जयंति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः।
नास्ति तेषां यशःकाये जरा मरणजं भयम_।।
अर्थात_ : - उन नवरसों को साध लेने वाले, उत्कृष्ट काव्य को लिखने वाले महाकवियों का अभिवादन है, जिनके कीर्ति रूपी शरीर में वृद्धावस्था और मरण का भय नहीं होता। अर्थात_ वह अपने यश रूपी शरीर से सदैव संसार में अमर हो जाते हैं।